PM Kaushal Vikas Yojana में हजारों करोड़ खर्च, लेकिन कितनी मिली नौकरी? CAG रिपोर्ट ने उठाए बड़े सवाल
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना पर CAG रिपोर्ट से मचा हड़कंप
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) को देश के युवाओं को रोजगार योग्य कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। इस योजना का लक्ष्य लाखों युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार दिलाना था।
लेकिन हाल ही में सामने आई भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने योजना के क्रियान्वयन पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में फर्जी प्लेसमेंट, संदिग्ध प्रशिक्षण केंद्र, गलत डेटा एंट्री और निगरानी की कमी जैसी कई अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।
क्या है प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)?
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की शुरुआत वर्ष 2015 में की गई थी।
योजना का उद्देश्य था:
- युवाओं को उद्योग आधारित प्रशिक्षण देना
- रोजगार के अवसर बढ़ाना
- स्किल इंडिया मिशन को मजबूत करना
- बेरोजगारी कम करना
2015 से 2022 के बीच योजना के विभिन्न चरण संचालित किए गए जिनके लिए हजारों करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया।
कितना पैसा खर्च हुआ?
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:
- कुल बजट: लगभग ₹14,450 करोड़
- जारी राशि: लगभग ₹10,194 करोड़
- लक्ष्य: 1.3 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण देना
कागजों पर लाखों युवाओं को प्रमाणपत्र भी जारी किए गए।
सबसे बड़ा सवाल: क्या युवाओं को नौकरी मिली?
किसी भी कौशल विकास योजना की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना रोजगार होता है।
रिपोर्ट के अनुसार:
- लाखों उम्मीदवारों को प्रशिक्षण प्रमाणपत्र दिए गए।
- लेकिन रोजगार प्राप्त करने वालों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही।
- प्लेसमेंट रेट को लेकर भी कई सवाल उठे।
फर्जी नियुक्ति पत्रों का आरोप
रिपोर्ट में एक राज्य का उदाहरण देते हुए बताया गया कि कुछ प्रशिक्षण प्रदाताओं ने दावा किया कि उन्होंने प्रशिक्षित उम्मीदवारों को नौकरी दिलवाई है।
लेकिन जब ऑडिट टीम ने संबंधित कंपनियों से सत्यापन किया तो कथित रूप से नियुक्ति पत्रों और रोजगार दावों की पुष्टि नहीं हो सकी।
इसके बाद रिकवरी प्रक्रिया शुरू की गई।
2 से 10 कर्मचारियों वाली कंपनी ने 33,000 लोगों को किया प्रमाणित?
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा उन संस्थाओं से जुड़ा है जिन्हें "Best in Class Employer" के रूप में दिखाया गया था।
जांच में कथित रूप से पाया गया कि:
- कुछ संस्थाओं के पास बहुत सीमित कर्मचारी थे।
- फिर भी उन्होंने हजारों उम्मीदवारों को प्रमाणित किया।
- कुछ मामलों में कार्यालयों के अस्तित्व पर भी सवाल उठे।
फोटोशॉप की गई तस्वीरें और संदिग्ध प्रशिक्षण रिकॉर्ड
रिपोर्ट के अनुसार:
- एक ही तस्वीर को कई बार इस्तेमाल किया गया।
- अलग-अलग तारीखों और स्थानों पर एक जैसी तस्वीरें दिखाई गईं।
- दस्तावेजों में असंगतियां पाई गईं।
इन घटनाओं ने प्रशिक्षण प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े किए।
बंद प्रशिक्षण केंद्रों को भी मिला पैसा?
जमीनी निरीक्षण के दौरान कुछ प्रशिक्षण केंद्र बंद पाए गए।
इसके बावजूद कुछ मामलों में प्रशिक्षण और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड मौजूद पाए गए, जिससे निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे।
डेटा एंट्री में बड़ी गड़बड़ियां
ऑडिट के दौरान डेटाबेस में कई विसंगतियां सामने आईं:
बैंक खातों की समस्या
- लाखों रिकॉर्ड में बैंक खाते अधूरे पाए गए।
- कई उम्मीदवारों के लिए एक ही बैंक खाता संख्या दर्ज थी।
- कुछ स्थानों पर काल्पनिक नंबर दर्ज पाए गए।
ईमेल आईडी की समस्या
- हजारों उम्मीदवारों के लिए एक जैसी ईमेल आईडी दर्ज की गई।
- कई ईमेल सत्यापन में असफल रहे।
- बड़ी संख्या में ईमेल अस्तित्व में ही नहीं थे।
निरीक्षण प्रक्रिया पर भी सवाल
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कुछ निरीक्षण रिकॉर्ड व्यवहारिक रूप से संभव नहीं लगते।
उदाहरण के तौर पर एक निरीक्षक द्वारा एक ही दिन में कई राज्यों के केंद्रों का निरीक्षण दर्ज किया गया, जिससे निरीक्षण प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठे।
रेगिस्तानी जिले में हजारों लाइफगार्ड?
रिपोर्ट में एक ऐसा उदाहरण भी सामने आया जिसने कई लोगों को हैरान कर दिया।
कथित तौर पर ऐसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लाइफगार्ड प्रमाणित किए गए जहां समुद्र तट या तैराकी सुविधाएं लगभग नहीं हैं।
इससे प्रशिक्षण और रोजगार दावों की वास्तविकता पर सवाल उठे।
स्किल इंडिया मिशन के लिए क्या सीख है?
विशेषज्ञों के अनुसार:
- मजबूत ऑडिट सिस्टम जरूरी है।
- आधार आधारित सत्यापन बढ़ाया जाना चाहिए।
- प्रशिक्षण केंद्रों की नियमित जांच होनी चाहिए।
- रोजगार दावों का स्वतंत्र सत्यापन होना चाहिए।
- डेटा गुणवत्ता में सुधार आवश्यक है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का उद्देश्य देश के युवाओं को रोजगार योग्य बनाना था, लेकिन CAG रिपोर्ट में सामने आए निष्कर्षों ने इसके क्रियान्वयन को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा की हैं।
यदि रिपोर्ट में उल्लिखित अनियमितताएं सही हैं, तो यह केवल वित्तीय नुकसान का मामला नहीं बल्कि उन लाखों युवाओं के भविष्य का प्रश्न भी है जिन्होंने बेहतर रोजगार की उम्मीद के साथ इस योजना में भाग लिया था।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि योजना के तहत खर्च हुए हजारों करोड़ रुपये का वास्तविक प्रभाव क्या रहा और भविष्य में ऐसी कमियों को रोकने के लिए क्या सुधार किए जाएंगे।
Disclaimer
यह लेख उपलब्ध CAG रिपोर्ट संबंधी दावों और ट्रांसक्रिप्ट में प्रस्तुत जानकारी पर आधारित है। अंतिम निष्कर्ष संबंधित सरकारी एजेंसियों, जांच रिपोर्टों और आधिकारिक स्पष्टीकरणों के आधार पर ही माने जाने चाहिए।

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